Saturday, 9 August 2014


आप सभी मित्रो को सामाजिक, पौराणिक, धार्मिक तथा ऐतिहासिक

                         भावना के धागे से बना पवित्र बंधन 

                                       


                                   "रक्षाबंधन" की अग्रिम ढेरो शुभकामनाये |

प्राचीन काल से प्रसंग भले ही अलग-अलग हो परंतु प्रत्येक प्रसंग में रक्षा की ज्योति ही प्रज्वलित होती रही है। पुरातन काल में रक्षा की भावना का उद्देश्य लिए ब्राह्मण क्षत्रिय राजाओं को रक्षा सूत्र बांधते थे, जहाँ राजा और ज़मींदार जैसे शक्तिवान एवं धनवान लोग उन्हे सुरक्षा प्रदान करने के साथ जीवन उपयोगी वस्तुएं भी उपहार में दिया करते थे।
आपसी सौहार्द तथा भाई-चारे की भावना से ओतप्रोत रक्षाबंधन का त्योहार हिन्दुस्तान में अनेक रूपों में दिखाई देता है। 
रक्षा की कामना लिये भाई-चारे और सदभावना का ये धार्मिक पर्व सामाजिक रंग के धागे से बंधा हुआ है। 

आप सभी को फिर से ढेर सारी शुभकामनाये 
(गौरव दुबे )

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