Friday, 15 August 2014


हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।__बोलो ,भारत
माता की जय ,इन्कलाब जिंदाबाद
आरक्षण विरोधी पार्टी जिन्दाबाद

आप सभी को स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्ठमी की अग्रिम शुभकामनाये |
पार्टी से जुड़ने के लिय आप संपर्क करे |
सीतेश पाठक (प्रदेश अध्यक्ष ) 
मो - 9911506026
गौरव दुबे (दिल्ली प्रदेश सचिव )
मो -9555696058

0 comments:

Post a Comment